प्रशासन ने पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गणेश/दुर्गा पंडाल समितियों और मूर्तिकारों से प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) के बजाय पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करने की अपील की
** पीओपी और रासायनिक रंगों से बने मूर्तियां पानी में घुलती नहीं हैं, जिससे नदियां और
तालाब दूषित। होते हैं
** पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए केवल सादी मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी इको-फ्रेंडली मूर्तियों
को दें बढ़ावा
** एडीएम एवं नगर मजिस्ट्रेट सहित समिति के सदस्यों ने किया लक्ष्मी तालाब का निरीक्षण, दिए साफ सफाई के निर्देश
आज जनपद में आने वाले त्योहारों के दृष्टिगत अपर जिलाधिकारी प्रशासन श्री शिव प्रताप शुक्ल, एसपी सिटी श्रीमती प्रीति सिंह,नगर मजिस्ट्रेट श्री प्रमोद झा, सीओ ट्रैफिक सुश्री आसमा वकार ने संयुक्त रूप से जनपद में आयोजित होने वाले पर्व के दृष्टिगत श्री गणेश एवं दुर्गा पंडालों की समितियों के सदस्यों से वार्ता करते हुए नियमों का पालन करने और जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन श्री शिव प्रताप शुक्ल ने समिति के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में प्रकृति की सुरक्षा और संरक्षण बड़ी चुनौती बन गया है। तीज-त्योहारों के मौके पर प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनने वाली प्रतिमाएं प्रदूषण का कारण बनती हैं। प्रदूषण को रोकने के लिए मिट्टी से बनाई जाने वाली प्रतिमाओं को पंडालों में स्थापित किया जाए।
अपर जिला अधिकारी ने समिति के सदस्यों से कहा कि पीओपी से बनी और रासायनिक रंगों से रंगी मूर्तियों के विसर्जन से नदी-तालाबों का जल विषाक्त होता है, हमारी संस्कृति में माटी से बनी गणेश प्रतिमाओं के पूजन की परंपरा है, जो तत्काल पानी में घुल जाती है और पर्यावरण (Save Environment) को तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचता है। भारतीय संस्कृति में मिट्टी, गोबर, सुपारी आदि से गणेश का प्रतीक बनाकर पूजने की परंपरा रही है। मंगल कलश में बनने वाले स्वास्तिक को भी गणेश ही माना जाता है। उन्होंने मिट्टी की प्रतिमा के साथ पीओपी के दुष्परिणामों से भी अवगत कराते हुए कहा कि इससे भविष्य में पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूकता का वातावरण रहेगा।
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि पीओपी मूर्तियों का विसर्जन (Immersion of POP Idols) तालाबों और कुंडों की जलभराव क्षमता को भी कम करता है, रासायनिक रंगों का दुष्प्रभाव मनुष्यों और पशुओं में अनेक रोगों को जन्म देता है, पीओपी से बनी मूर्तियां लम्बे समय तक जल में नहीं घुलती, उन्होंने कहा कि मिट्टी की मूर्ति लोग अपने घर ले जाकर पूजन के उपरांत मूर्ति का विसर्जन घर पर ही कर सकते हैं।
आयोजित बैठक में समितियों के सदस्यों द्वारा त्योहारों के दृष्टिगत लक्ष्मी तालाब की साफ सफाई के साथ ही स्थापित होने वाले पंडालों के आसपास भी पर्याप्त साफ-सफाई कराए जाने का अनुरोध किया। सदस्यों ने इस दौरान पंडालों के आस-पास नॉनवेज की दुकानों को भी बंद किए जाने का अनुरोध किया ताकि सुखद और सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहारों का उत्सव आयोजित किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, सदस्यों द्वारा जल विहार के मेले में निकलने वाले प्रत्येक विमान को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया।
बैठक के पश्चात् अपर जिलाधिकारी प्रशासन, एसपी सिटी, अपर नगर आयुक्त,नगर मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी पुलिस, क्षेत्राधिकारी ट्रैफिक ने समिति के सदस्य श्री रवीश त्रिपाठी, श्री पीयूष रावत सहित अन्य सदस्यगण लक्ष्मीताल विसर्जन मार्ग एवं कुंड का निरीक्षण किया।
————————————–
जिला सूचना कार्यालय द्वारा प्रसारित

