अन्नदाता डेयरी को खेती के साथ-साथ आय का मुख्य स्रोत बनाए:- सीडीओ
** सीडीओ की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में आयोजित हुआ जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव
** कॉन्क्लेव में दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों एवं कृषकों को डेयरी व्यवसाय के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक एवं सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
** पशुपालकों को पशुओं में होने वाली सामान्य बीमारियाँ, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान एवं संतुलित आहार के बारे में भी बताया
** डेयरी विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डेयरी विकास योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, नंद बाबा मिशन एवं बैंक ऋण से संबंधित योजनाओं की दी जानकारी
** कार्यक्रम में दुग्ध संघों एवं निजी डेयरियों के साथ अनुबंधित होने वाले कृषकों को अनुबंध पत्र किए वितरित
उत्तर प्रदेश में दुग्धशाला विकास विभाग के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में 05 अगस्त 2026 को जनपद के दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों एवं कृषकों को डेयरी व्यवसाय के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दुग्धशाला विकास विभाग एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आज विकास भवन सभागार में “जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव” का आयोजन मुख्य विकास अधिकारी श्री रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
जनपद स्तरीय डेयरी काॅन्क्लेव का शुभारंभ अध्यक्षता कर रहे मुख्य विकास अधिकारी श्री रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड एवं अपर निदेशक पशुपालन डॉ0 अरविंद कुमार साहू, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ0 संजय कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य विकास अधिकारी श्री रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने जनपद के अन्नदाताओं से कहा कि डेयरी को खेती के साथ-साथ आय का प्रमुख स्रोत बनाते हुए अपनी आय दोगुनी कर सकते है। इसके लिए पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धति से डेयरी प्रबंधन अपनाना होगा। शासन द्वारा डेयरी विकास हेतु अनेक योजनाएं संचालित हैं, जिनका अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
उन्होंने पशुपालन विभाग को निर्देश दिए की अपनी योजनाओं का ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार प्रसार करना सुनिश्चित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि डेयरी कॉन्क्लेव से प्राप्त जानकारी को विकास खण्ड स्तर तक ले जाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इच्छुक पशुपालकों को योजनाओं से जोड़कर उनका लाभ दिलाया जाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने पंचायत भवनों में प्रचार प्रसार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि दूरदराज क्षेत्र के रहने वाले अन्य कृषकों को भी लाभकारी योजनाओं की जानकारी मिल सके।
आयोजित काॅन्क्लेव में आगरा से आए डॉ0 अरविन्द कुमार सागर अपर निदेशक पशुपालन ने पशुओं में रोग नियंत्रण समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों पर प्रकाश डाला।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय कुमार सिंह ने किसानों से संवाद कार्यक्रम में उपस्थित किसानों की समस्याओं का समाधान किया।उन्हें आधुनिक डेयरी व्यवसाय अपनाने हेतु प्रोत्साहित करते हुए डेयरी विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री डेयरी विकास योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, नंद बाबा मिशन एवं बैंक ऋण से संबंधित योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। उनके द्वारा पात्र पशुपालकों को अनुदान एवं सब्सिडी की प्रक्रिया समझाई गई।
कॉन्क्लेव में उपस्थित विभिन्न
विशेषज्ञों द्वारा उद्गुप्त उत्पादकों एवं जेरी प्रबन्धकों को स्वचालित दुग्ध दोहन, दूध की गुणवत्ता जांच, मिल्क कूलिंग सिस्टम एवं डिजिटल रिकॉर्ड कीपिंग पर विस्तृत जानकारी दी गई। पशुपालकों को दूध उत्पादन बढ़ाने हेतु वैज्ञानिक विधियों से प्रशिक्षित किया गया। इसके अतिरिक्त पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशुओं में होने वाली सामान्य बीमारियों, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान एवं संतुलित आहार के बारे में बताया। हरे चारे की उपलब्धता, साइलेज बनाने एवं पोषक तत्वों की जानकारी दी गई। पशुओं के बीमा एवं टैगिंग पर भी जोर दिया गया।
आयोजित कार्यक्रम में दुग्ध संघों एवं निजी डेयरियों के साथ अनुबंधित होने वाले कृषकों को अनुबंध पत्र वितरित किए गए। इससे किसानों को दूध का उचित मूल्य एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा।
कॉन्क्लेव में जिला विकास अधिकारी श्री राजेश कुमार, दुग्ध विकास अधिकारी श्री राजेश कुमार सोनकर, जीएम डीवीएसएस श्री संजय सिंह,उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ0 नीरज चौधरी, डॉ0 प्रमोद द्विवेदी, डॉ0 उदय कुमार राजपूत, डॉ0 प्रतीक दीक्षित, डॉ0 आशीष कुमार गुप्त, डॉ0 विक्रम सिंह राजपूत, जिला दुग्ध अधिकारी, बैंक प्रबंधक, प्रगतिशील डेयरी उद्यमी एवं जनपद के दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक उपस्थित रहे।
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जिला सूचना कार्यालय द्वारा प्रसारित

