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श्री राम कथा की कलश यात्रा धूमधाम के साथ निकाली गई। नगर वासियों ने कलश यात्रा का फूल बरसाकर स्वागत एवं सम्मान किया।

ByBKT News24

Jan 23, 2026


श्री राम कथा की कलश यात्रा धूमधाम के साथ निकाली गई।
नगर वासियों ने कलश यात्रा का फूल बरसाकर स्वागत एवं सम्मान किया।

मोंठ (झांसी)।शुक्रवार को कस्बा मोंठ की पावन धरा उस समय पूर्णतः भक्तिरस में डूब गई, जब प्राचीन धर्मस्थली किला परिसर स्थित श्री शीतला धाम प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिवस भव्य एवं दिव्य कलश शोभायात्रा का आयोजन हुआ। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और राम नाम के जयघोष के साथ निकली इस मंगल यात्रा ने समूचे नगर को राममय कर दिया।सुबह से ही श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित 1100 महिलाएं सिर पर कलश धारण किए, मंगल गीत गाती, भक्ति भाव से लीन होकर चल रही थीं। उनके मुख पर श्रद्धा, नेत्रों में आस्था और होठों पर “जय श्रीराम” का मधुर उच्चारण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहा था। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया, कई स्थानों पर दीप प्रज्वलन एवं आरती कर पुण्य लाभ अर्जित किया गया।
शोभायात्रा श्री शीतला धाम प्रांगण से प्रारंभ होकर कस्बे के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः कथा स्थल पर संपन्न हुई। आगे-आगे बैंड-बाजों की मधुर धुन, पीछे श्रद्धालुओं की टोलियां और चारों ओर गूंजता राम नाम—यह दृश्य अत्यंत मनोहारी एवं भावविभोर कर देने वाला रहा।कथा के प्रथम दिवस पूज्य आचार्य शांतनु जी महाराज ने श्रीराम कथा का आध्यात्मिक महत्त्व प्रतिपादित करते हुए कहा कि भगवान की असीम कृपा से ही जीव सन्मार्ग की ओर अग्रसर होता है। माता पार्वती की शंका का समाधान करते हुए भगवान महादेव के उपदेशों का वर्णन किया गया, जिसमें बताया गया कि ईश्वर सगुण भी हैं और निर्गुण भी—भक्त जिस भाव और रूप में स्मरण करता है, प्रभु उसी रूप में दर्शन देते हैं।मानस की महिमा पर प्रकाश डालते हुए पूज्य महाराज ने कहा कि श्रीरामचरितमानस कल्पवृक्ष के समान है—निर्मल मन से इसका गायन करने वाले को अभीष्ट फल अवश्य प्राप्त होता है। भगवान शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि शिव और पार्वती श्रद्धा एवं विश्वास के प्रतीक हैं, इसी कारण रामकथा में सर्वप्रथम उनकी कथा आती है। शिव बारात का वर्णन करते हुए समाज में व्याप्त कुरीतियों पर भी उन्होंने सारगर्भित संदेश दिया और आत्ममंथन का आह्वान किया।
आरती परीक्षित भगत सिंह एवं पानकुँअर परिहार ने संपन्न कराई। कार्यक्रम के आयोजक रामजी परिहार ने पधारे संत-महंतों एवं अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महंत वैदेही शरण महाराज (अयोध्या धाम) ने सभी श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।इस अवसर पर गरौठा विधायक जवाहरलाल राजपूत, एमएलसी रमा निरंजन, योगी अर्पित दास महाराज, महंत केशव दास महाराज, महंत प्रवीण दास महाराज, राकेश दास महाराज सहित अनेक संत-महंत एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। साथ ही छत्रपाल राजपूत, कृष्णचंद्र तिवारी, कपिल मुदगिल, राजू चौहान, देवेंद्र गुसांई, हाकिम सिंह चौहान, योगेंद्र त्रिपाठी, ब्रह्मजीत द्विवेदी, गुरदीप गुर्जर, पुष्पेंद्र दुबे, वीरप्रताप चौहान, दयाल गिरि, धर्मेंद्र वर्मा, विकास निरंजन, श्यामविहारी दुबे, शिवप्रताप बुंदेला, गजेंद्र चौहान, सौरभ गिरि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अजय शुक्ला ने किया।
समूचे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और मर्यादा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे मोंठ की धरती पर श्रीराम कथा का शुभारंभ अत्यंत मंगलमय वातावरण में आज से आगामी 31 जनवरी 2026 तक चलेगा।


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