पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा नई दिल्ली में राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं भव्य सम्मान समारोह सम्पन्न

समारोह में डॉ. इन्दुमति सरकार को मिला विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान
मथुरा । पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा देश की राजधानी नई दिल्ली में 26 अक्टूबर को राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
हिन्दी को राष्ट्रभाषा की मान्यता हेतु निरन्तर प्रयासरत एवं देश के विद्वानों को सम्मानित करने हेतु सतत् प्रयासरत पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ , वृन्दावन धाम, मथुरा द्वारा नई दिल्ली के
पांच सितारा होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वत जनों को मेडल , प्रशस्ति पत्र एवं शॉल ओढ़ाकर “विद्या वाचस्पति” सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया।
भव्य समारोह के मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ अरविन्द कुमार , मुख्य वक्ता संगाई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ सच्चिदानंद राय एवं विशिष्ट अतिथि , संस्था के संयोजक डॉ. किरण बोंगले तथा छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ. रविन्द्र द्विवेदी ने मंत्रोच्चारण के साथ वैदिक रीति से दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया ।
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अरविन्द कुमार ने सम्मान समारोह में मंचासीन अतिथियों ने उपस्थित विद्वतजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज देश के हर प्रान्त में हिन्दी भाषा बोली जाने लगी है उन्होंने कहा कि
संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। संविधान में यह तय किया था कि हिन्दी राजभाषा होगी,अब वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए।
सम्मान समारोह में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों , लेखकों , शिक्षकों, साहित्यकारों एवं अन्य विद्वत जनों ने हिन्दी भाषा के उत्थान को लेकर अपने विचार प्रकट किए।
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. इन्दुमति सरकार को पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा उनके साहित्यिक कार्यों व प्रेमचंद के उपन्यासों में स्त्री विमर्श शोध हेतु विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान की उपाधि प्रदान की गई है। डॉ. इन्दुमति सरकार की अब तक अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। जिनमें कच्ची पगडंडी, धूल के फूल, क्षितिज के पार, मैं और मेरी इक्यावन कविताएं व राम तेरे कितने नाम नामक उपन्यास सर्वाधिक लोक प्रचलित है। कार्यक्रम के अन्त में विद्यापीठ द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन डॉ. अच्युतराव बायबसे ने किया ।
