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वन्य जीवों पर होने वाले अपराधों की जब होगी जानकारी, तभी अपराधियों को पकड़ना होगा मुमकिन:- मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन

ByBKT News24

Mar 1, 2026


वन्य जीवों पर होने वाले अपराधों की जब होगी जानकारी, तभी अपराधियों को पकड़ना होगा मुमकिन:- मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन

** वन्यजीव अपराध विषय पर आयोजित हुई एक दिवसीय कार्यशाला

** विशेषज्ञों ने दी बुंदेलखण्ड जोन के वन अधिकारियों को फॉरेस्ट एक्ट की दी जानकारी

श्री एच0 वी0 गिरिश मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन झांसी की अध्यक्षता में वन मुख्यालय स्थित “वेत्रवाती सभागार” वन्यजीव अपराध विषयक बुंदेलखण्ड जोन स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो नई दिल्ली(WCCB) के सौजन्य से संपन्न हुआ।
आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में वन संरक्षक झाॅसी एंव वन संरक्षक बांदा के साथ-साथ उरई, झाॅसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा एवं बांदा जिलों के वन प्रभागों से आए प्रभागीय वनाधिकारियों, उप प्रभागीय वनाधिकारियों, क्षेत्रीय वनाधिकारियों, वन दरोगा तथा वन रक्षकों व अन्य फील्ड स्टाफ ने प्रतिभाग किया।
एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मुख्य वन संरक्षक श्री एच0वी0 गिरीश ने आयोजित होने वाली कार्यशाला के मुख्य बिंदु की जानकारी देते हुए बताया कि कानूनी सुदृढ़ीकरण: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं जैसे कि शिकार और अवैध व्यापार से संबंधित कानूनों का गहराई से विश्लेषण। अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों का प्रशिक्षण: वन रक्षकों को अपराध स्थल (Crime Scene) की सुरक्षासबूत जुटाने और मामलों को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना।
जागरूकता और जांच: वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को रोकने के लिए खुफिया जानकारीफोरेंसिक साक्ष्यऔर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को समझने के तरीके। समुदाय और नीति: वन्यजीव अपराधों के प्रभाव को कम करने के लिए जन जागरूकता वैकल्पिक आजीविका और कानूनी विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक दृष्टिकोण।
उक्त कार्यशाला में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, दिल्ली से पधारे विषय विशेषज्ञ श्री विष्णु राज नायर आईएफएस सामाजिक वानिकी वन प्रभाग द्वारा एक दिवसीय वन और वन्यजीव प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों पर जानकारी दी गई। श्री नायल ने वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट और भारतीय वन अधिनियम के बारे में विस्तार से बताया। कार्यशाला में मानव-वन्यजीव संघर्ष और पर्यटन संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
श्री अर्नव वासु वाइल्ड लाईफ इंस्पेक्टर ने वन अधिकारियों को एक दिवसीय वन एवं वन्यजीव प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला में वन्यजीव एवं वन संपदा से जुड़े सुरक्षा संबंधी कानून का प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में लीगल एडवाइजर श्री सुरेश चंद्र यादव ने वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 की धारा 38(र)एवं भारतीय वन अधिनियम की अन्य धाराओं व उपधाराओं के बारें में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही वन संबंधी कानून के गहन जानकारों ने अपराध से जुड़ी धाराओं के बारे में व्यापक रूप से विस्तृत जानकारी दी ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों व विवेचकों को धाराओं व उपधाराओं की जानकारी के अभाव में अपराधी आसानी से छूट जाते हैं और पुनः अपराध की पुनरावृत्ति करते हैं। ऐसे में यदि विवेचक को धाराओं की सही जानकारी हो तो आरोपी का छूटना मुश्किल हो जाता हैं। वन अधिवक्ता ने शिकार, वन्यजीवों की तस्करी, उनके अंगों की तस्करी, वन उपज की तस्करी, अवैध पातन, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के साथ छेड़छाड़ या नष्ट करना, शिकारी से बरामद वाहन, अस्त्र- शस्त्र, आग्नेयास्त्र आदि पर लगायी जाने वाली धाराओं व उपधाराओं की व्याख्या सहित विस्तार से जानकारी दी।
इसके साथ ही कार्यशाला में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो दिल्ली से आए लीगल एडवाइजर द्वारा वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध केस रजिस्टर्ड करनी केस की फर्द बरामदी तैयार करने सीज़र, रिपोर्ट बनाने, साक्ष्यों व नमूनों को सावधानीपूर्वक एकत्र करने, केस की जांच में महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ करने, केस के अभिलेखीकरण एवं तकनीक व विधिक जानकारी विस्तारपूर्वक कैसे प्रदान की जाए पर प्रकाश डाला।
उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यून करने के लिये स्थानीय लोगों की भूमिका व प्रतिकूल स्थिति ने निपटने के बारे में व्यापक जानकारी दी। आयोजित कार्यशाला में वन एवं वन्यजीव विशेषज्ञ ने वन एवं वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दी। इसी क्रम में क्षेत्रीय वनाधिकारी ने रेंज में पर्यटन की संभावनाओं को किस प्रकार और बढ़ाया जायें पर अपने विचार रखें।
आयोजित कार्यशाला में वन संरक्षक झांसी श्री महावीर कौजालगी ने बुंदेलखण्ड जोन से आए समस्त वन अधिकारियों एंव कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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जिला सूचना कार्यालय द्वारा प्रसारित