मेडिकल हब है झाॅसी, मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि:-डीएम
** ICU, NICU, OT में एंट्री एग्ज़िट अलग रखें,वहां ज्वलनशील सामग्री न रखें:- डीएम
** फायर सेफ्टी के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने नर्सिंग होम्स के संचालकों एवं डॉक्टरों के साथ की बैठक
** झाँसी विकास प्राधिकरण के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए
** हर फ्लोर पर लगाएं ISI मार्क वाले फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर फायर अलार और हूटर भी लगवाना सुनिश्चित करें
** नर्सिंग होम संचालकों को दी नसीहत, बेसमेंट का इस्तेमाल मरीज वार्ड के लिए नहीं पार्किंग/ स्टोर के लिए ही करें
** मानको का पालन न करने पर उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम 2022 के तहत 50 हजार से 05 लाख तक जुर्माना और पंजीकरण निरस्त करने की होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट गांधी सभागार में जनपद के समस्त निजी नर्सिंग होम्स, अस्पतालों एवं क्लीनिक के संचालकों के साथ फायर सेफ्टी को लेकर बैठक आयोजित की गई।
जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी ने कहा कि झाँसी आसपास के क्षेत्रों के लिए मेडिकल हब है, आने वाले मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में अग्निकांड की घटनाएं बढ़ जाती हैं, ऐसे में सभी चिकित्सा संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि सभी नर्सिंग होम 50 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों में अनिवार्य रूप से फायर एनओसी लें। प्रत्येक तल पर फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म एवं स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए जाएं। आपातकालीन निकास द्वार किसी भी दशा में अवरुद्ध न हों एवं उन पर स्पष्ट संकेतक लगाए जाएं।
जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी को निर्देश दिए गए कि अभियान चलाकर सभी अस्पतालों की फायर सेफ्टी की जांच कर ली जाए। विद्युत लोड के अनुसार वायरिंग की जांच कराकर शॉर्ट सर्किट से बचाव के उपाय किए जाएं। सभी स्टाफ को फायर मॉकड्रिल का प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि बिना फायर एनओसी के कोई भी नर्सिंग होम/अस्पताल संचालित न हो इसे अवश्य सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त मरीजों की शिफ्टिंग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था एवं एंबुलेंस मार्ग बाधा रहित रखे जाएं।
बैठक से पूर्व अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्रीमती पल्लवी मिश्रा ने उपस्थित नर्सिंग होम्स के संचालक एवं चिकित्सकों से संवाद करते हुए कहा कि बेसमेंट का इस्तेमाल मरीज वार्ड के लिए न करें, केवल पार्किंग स्टोर के लिए ही किया जाए। सुरक्षा के दृष्टिगत आपातकालीन निकास द्वार कम से कम 02 होने चाहिए। रास्ता खुला रखें ताला न लगाएं ताकि अनहोनी होने पर मरीजों को सुरक्षित निकाला जा सके। नर्सिग होम्स को फायर सेफ्टी के लिए फायर सेफ्टी प्लान, बिल्डिंग का नक्शा और विद्युत लोड प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से लेना होगा एवं सालाना फायर ऑडिट कराकर रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय में जमा करें।
बैठक में मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री आर के राय ने उपस्थित नर्सिंग होम संचालक एवं चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि आईसीयू,ओटी और वार्ड में 6 महीने पर वायरिंग की जांच कराएं ताकि शॉर्ट सर्किट की आशंका खत्म की जा सकें। उन्होंने यूपीएस जनरेटर के लिए अलग फायर प्रूफ रूम बनाए जाने का भी सुझाव दिया। सभी डॉक्टर नर्स वार्डबॉय को एक्सटिंग्विशर चालानी की ट्रेनिंग दी जाए। इसके साथ ही मरीजों को निकालने की इवैकुएशन प्लान हर वार्ड में चस्पा किया जाए।
बैठक में डॉ0 सतीश अग्रवाल विनायक हॉस्पिटल, डॉ0 आरआर सिंह राघवेंद्र हॉस्पिटल,डॉ0 आलोक अग्रवाल मेवा चौधरी नर्सिंग होम, डॉ0 राकेश त्रिपाठी उपचार हॉस्पिटल, डॉ0 प्रमोद गुप्ता आईएमए अध्यक्ष, डॉ0 शैलेन्द्र वाष्णेय नीमा, सहित मुख्य विकास अधिकारी, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी जनपद के 70 से अधिक नर्सिंग होम संचालक उपस्थित रहे।
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जिला सूचना कार्यालय द्वारा प्रसारित

