आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर ग्राम लोहागढ़ में पथ संचलन — “भारत माता की जय” के नारों से गुंजा गांव
मोंठ (झांसी)। आज मंगलवार को तहसील क्षेत्र के प्रगतिशील ग्राम लोहागढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों द्वारा संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सह जिला प्रचारक रंजीत भाई साहब . खण्ड प्रचारक .अंकित भाई साहब . खण्ड .संघ चालक अखिलेन्द्र मास्टर . खण्ड कार्यवाह उमाशंकर . व सियाशरण, राजपूत (मुन्ना मुखिया ) सम्पर्क प्रमुख . हुकुम सिंह, पाल . खण्ड प्रचार प्रमुख . . जिला गतिविधि . राकेश पाल ., शिशु पाल गुर्जर खण्ड सेवा प्रमुख . . ब्लाक अध्यक्ष भारतीय . किसान संघ रामकृपाल सिंह गुर्जर (ग्राम प्रधान ) . दिग्विजय सिंह, (सिह साहव ) तंदुल सिंह गुर्जर .
।पथ संचलन का शुभारंभ छोटी मात मंदिर से हुआ, जो रिंकू दुबे परसादिया माड़बारी मंदिर, राजू गुप्ता, रामपाल सिंह, सुबेदार श्याम जी के मकान होते हुए पीएनबी बैंक से गुजरता हुआ ऐतिहासिक लोहागढ़ किले तक पहुंचा। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में दण्ड .
के साथ कदम से कदम मिलाकर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारे लगाए, जिनसे पूरा गांव देशभक्ति के उल्लास से गूंज उठा।
गांव की गलियों में लोगों ने स्वयंसेवकों पर फूलों की वर्षा की और जगह-जगह जलपान की व्यवस्था की। गई . कार्यक्रम के दौरान एसआई जयकुमार, विनोद, कुमार . शुखवीर आदि पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद रहे।
इस अवसर पर राजेंद्र सिंह .आचार्य, .यशपाल सिंह, रामकृपाल सिंह, शिशपाल सिंह गुर्जर . विश्वनाथ राजपूत मुखिया . करन राजपूत . पुष्पेन्द्र राजपूत ., आकाश गुर्जर . रामपाल सुबेदार, बालजी तिवारी . तन्दुल सिंह गुर्जर .. प्रेमपाल .बलवान राजपूत करई . रामनरेश पाल . राघवेन्द्र परसादिया . . समेत अनेक ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सह जिला प्रचारक रंजीत भाई साहब एवं प्रचारक अकित जी ने अपने उदबोधन मे पंच परिवर्तनो को विस्तार से बताया .
> “संघ ही एकमात्र संगठन है जो भारत को सदा विजयी और यशस्वी देखना चाहता है। हमारा उद्देश्य राष्ट्र निर्माण, सेवा और समाज में एकता का संकल्प है।”
आरएसएस का संक्षिप्त इतिहास
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर (महाराष्ट्र) में की थी। इसका उद्देश्य भारत में राष्ट्रभावना का जागरण, समाज में संगठन और अनुशासन की भावना को सुदृढ़ करना था। प्रारंभ में कुछ स्वयंसेवकों से आरंभ हुआ यह संगठन आज विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक है। संघ देशभर में शिक्षा, सेवा, संस्कार और स्वावलंबन के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। वर्तमान में संघ अपने शताब्दी वर्ष (100 वर्ष) के अवसर पर गांव-गांव में पथ संचलन और जनजागरण कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है, जिससे समाज में राष्ट्रीय एकता और जागरूकता का संदेश पहुंचे। इस अवसर पर समस्त स्वयं सेवक बन्धु उपस्थित रहे .
