हर कदम पर साथ निभाएं, दिव्यांगजन का मान बढ़ाएं :- जिलाधिकारी
** डीएम ने जीओसी साथ किया झाॅसी कैंट में संचालित आशा स्कूल का निरीक्षण
** दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण पर दिया जोर
** भ्रमण के दौरान बच्चों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट्स और पेंटिंग का किया अवलोकन, बढ़ाया मान
जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी ने जीओसी 31st आर्मर्ड डिवीजन के साथ झाॅसी कैंट स्थित आसा स्कूल का भ्रमण किया। यह स्कूल सेना द्वारा दिव्यांग बच्चों के कल्याण के लिए संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं बल्कि शारीरिक या मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को संवेदनशीलता, समान अवसर और उचित सम्मान की आवश्यकता होती है।उन्होंने कहा समाज में दिव्यांगजनों को सहानुभूति के बजाय बराबरी का हक मिलना चाहिए ताकि वे अपने आत्मविश्वास के बल पर आगे बढ़ सकें।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस स्कूल में दिव्यांक, बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास एवं दैनिक जीवन के कुशलतापूर्वक निर्वहन हेतु प्रदान की जा रही शिक्षा को देखा और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बच्चों द्वारा बनाए गए प्रोडेक्ट्स का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग को नई सोच से समाज की मुख्यधारा धारा से जोड़ना है सहानुभूति से नहीं, हम दिव्यांग को दया की दृष्टि से देखने के बजाय उनके अधिकारों और समान भागीदारी का समर्थन करें। उन्हें प्यार, मधुर व्यवहार और आदर देकर उनके भीतर छुपी प्रतिभा को बाहर लाने में मदद करें और खेल, कला, संगीत और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए उनकी कमजोरी को उनकी ताकत में बदलें।
जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी ने झांसी कैंट स्थित आशा स्कूल का भ्रमण करते हुए दिव्यांग बच्चों को सशक्त बनाकर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की, उन्होंने बच्चों द्वारा तैयार किए गए प्रोडक्ट को शोकेस किए जाने और जिला प्रशासन की ओर से यथासंभव आवश्यक सहयोग प्रदान करने हेतु उपस्थित बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए।
भ्रमण के दौरान जीओसी 31st आर्मर्ड डिवीजन द्वारा जानकारी दी गई कि आशा स्कूल विशेष बच्चों को, उनकी दिव्यांगता की परवाह किए बिना, एक विद्यालय के वातावरण में आवश्यक सुविधाएं और योग्य शिक्षक प्रदान करना, जो पाठ्यचर्या अनुकूलन, व्यक्तिगत सहायता, पुनर्वास चिकित्सा और माता-पिता की भागीदारी के माध्यम से सीखने की सुविधा प्रदान करता है। स्कूल का मुख्य उद्देश्य जीवन कौशल, सामाजिक कौशल और आजीविका कौशल के विकास के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता को पोषित करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।
उन्होंने बताया कि यह विद्यालय छात्रों को उनकी अधिकतम क्षमता तक शैक्षिक अवसर प्रदान करता है, ताकि मुख्यधारा की संस्थाओं में उनके पुनर्वास की संभावनाओं में सुधार हो सके। यह विद्यालय वयस्क जीवन में अधिक आत्मनिर्भरता के लिए दिव्यांग बच्चों के संचार और सामाजिक कौशल में सुधार को विशेष प्रोत्साहन देता है। यह विद्यालय उचित फिजियोथेरेपी प्रदान करके बच्चे की शारीरिक क्षमता में सुधार करना है, साथ ही मानसिक क्षमता के निरंतर विकास के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को सुनिश्चित करता है।
उन्होंने आशा स्कूल की जानकारी देते हुए बताया कि यह विद्यालय बच्चे को दिव्यांगता को कम करने और यदि संभव हो तो उस पर काबू पाने में मदद करने के लिए उपकरण/उपकरण/कृत्रिम अंग प्रदान करता है, विद्यालय विशेष शिक्षा, चिकित्सा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, खेलकूद, भ्रमण और सांस्कृतिक गतिविधियाँ प्रदान करता है, जो दिव्यांग बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। पाठ्यक्रम राष्ट्रीय दिव्यांगजन संस्थान द्वारा निर्धारित पैटर्न पर आधारित है। इसके अतिरिक्त, बच्चों को दिन के भोजन और स्कूल बस की सुविधा भी प्रदान की जाती है।
जिलाधिकारी श्री गौरांग राठी ने स्कूल से विदा लेते हुए बच्चों, आशा स्कूल के संचालकों और शिक्षकगणों का उत्साहवर्धन किया। स्कूल के संचालन और बच्चों की सहायता हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
इस अवसर पर भ्रमण के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री जितेन्द्र कुमार गौड़, विशेषज्ञ अध्यापक श्री रत्नेश त्रिपाठी और प्रधानाचार्य सहित अनेकों बच्चे और शिक्षक सहयोगी कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।
—————————————-
जिला सूचना कार्यालय द्वारा प्रसारित

