अभिनय की कला आनी चाहिए, मंच जरूर मिलेगा: आसिफ शेख
बुंदेलखंड लिट्रेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन बड़ी संख्या में पहुंचे लोग, खरीदीं किताबें, अथाई पर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की
झांसी। अभिनेता में अभिनय की कला होनी चाहिए। मंच जरूर मिलता है। मैं तो कैमरे के पीछे काम करके आगे आया हूं। लगातार दुनिया में चल रहीं घटनाओं पर बारीक नजर रखना हमें अच्छा कलाकार बनाता है। साथ ही डायरेक्टर के दृष्टिकोण से भी सोचना होता है। वहीं, छोटे शहरों से निकले अन्य कलाकार भी बड़े शहरों में नाम कर रहे हैं। ओटीटी आने के बाद यह और बढ़ा रहा है। लोगों को भी सिनेमा के किरदार अपने ही बीच के लगने लगे हैं। आज भाषा की बाधा समाप्त हो गई है। ये बातें पंचायत और मिर्जापुर वेब सीरीज से चर्चित अभिनेता आसिफ खान ने कहीं।
वे बुंदेलखंड लिट्रेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन आठवें सत्र में वक्ता के तौर पर मौजूद थे। उनसे अभिनय के कितने रंग विषय पर लेखक प्रो. मुन्ना पांडेय ने बातचीत की। फेस्टिवल झांसी किले की तलहटी स्थित जनरल बिपिन रावत शहीद पार्क में चल रहा है।
इससे पहले दिन में पहले सत्र में पीसीएस अधिकारी परमानंद सिंह ने कहा कि कहा कि देश के विकास में सिविल सेवकों की बड़ी भूमिका है। किसी गरीब को मकान और राशन दिलवाकर आत्मिक संतुष्टि मिलती है। हालांकि तैयारी के दौरान अक्सर त्वरित सफलता नहीं मिलती, लेकिन इससे घबराना नहीं है। असफलता ही सफलता की नींव रखती है। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस जरूरत उन्हें उचित प्लेटफॉर्म मिलने की है। विज्ञप्ति पीसीएस इस क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है। हिन्दी भाषा भी धीरे-धीरे अपना परचम पहरा रही है। यह चर्चा फ्री कोचिंग प्लेटफॉर्म विज्ञप्ति पीसीएस के मेंटोर पीपी सिंह, अनुभव राज, विकास और अंकित ने की।
*रटें नहीं पढ़ी गई बातों का चिंतन-मनन करें*
दूसरा सत्र प्रशासनिक सेवाओं का ताना-बाना विषय में शिक्षाविद डॉ. शैलेंद्र सिंह ने आईएएस अधिकारी गिरवर दयाल से चर्चा की। गिरवर दयाल ने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करते समय टाइम ऑडिट पर ध्यान देना है। यानी कितना समय व्यर्थ हो रहा है इस मेंपर ध्यान देना है। वर्तमान समय में प्रश्नपत्र का पैटर्न बदला है। इसलिए केवल रटना नहीं है बल्कि पढ़ी गयी बात पर मनन और चिंतन भी करना है। उदाहरण के तौर पर इतिहास के प्रश्नपत्र में अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण से प्रश्नपत्र आते हैं। वहीं, कम शब्दों में उत्तर लिखना होता है इसलिए पेन और कागज पर रोजाना लिखने का अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के सकारात्मक प्रयोग पर जोर दिया। एआई यूपीएससी के तार्किक प्रश्नों को हल करने में सक्षम नहीं है, इसलिए उसके भरोसे न रहें। 3-4 वर्षों के लिए केवल एकमात्र लक्ष्य लेकर यूपीएससी की तैयारी करिए। सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने हिंदी माध्यम से तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सफलता के लिए, इंजीनियरिंग के छात्रों का उदाहरण देते हुए रोजाना गहन पढ़ाई करने और अपनी क्षमता में उन्नति करने की सलाह दी। इस दौरान गिरवर दयाल ने खुद घोषणा की कि वे और शैलेंद्र, यदि सिविल सर्विसेज में कोई भी विद्यार्थी बुंदेलखंड क्षेत्र से टॉप करेगा तो उसकी माताजी को अपनी तनख्वाह से फलों-फूलों से तौलेंगे। यह कार्यक्रम बुंदेलखंड लिट्रेचर फेस्टिवल में ही संपन्न होगा।
*राग दरबारी के सामने श्रीलाल शुक्ल की अन्य रचनाएं दब गईं*
तीसरे सत्र में राग दरबारी पर लेखक डॉ. मुन्ना पाण्डेय ने लेखक व पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी डॉ. दीपक जायसवाल और लेखक व पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी मृत्युंजय कुमार से चर्चा की। मृत्युंजय कुमार ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल के पिता संगीत के शौकीन थे इसलिए बचपन से ही उन्हें संगीत की बारीकियों को सीखने को मिलीं। राग दरबारी के माध्यम से वह दरबारी व्यवस्था को बताना चाहते थे हालांकि राग दरबारी के सामने उनकी अन्य रचनाएं दब गईं इस बात का उनको दुःख था। उन्होंने रचना, कृति के माध्यम से अशिक्षा, कुरीतियों के बारे में बताया। लेखक के पास ज्ञान होता है तो दिखता है तो उनकी रचनाओं में उभरकर आता है।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल की रचनाओं को पढ़ते समय मुझे याद आता है कि जैसे धरातल पर नदी की तरह चल रही है। इसमें व्यवस्था में विसंगति पर हास्य और व्यंग्य दोनों हैं। उन्होंने कहा कि कमलेश्वर मिश्र से उम्र पूछी जाती है तो वह थोड़ा सोचा साढ़े 5 हजार साल बताते हैं जो हमारी संस्कृति है।
*गैर सरकारी संस्थाएं बहुत काम कर रहीं*
चौथे सत्र में साहित्य के प्रचार – प्रसार में साहित्यिक संस्थाओं का महत्व पर विशाल पाण्डेय ने हिंदी अकादमी के उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने कथाकार व आलोचक उर्मिला शिरीष और लेखक सुधाकर पाठक से चर्चा की। उर्मिला शिरीष ने कहा कि बीएलएफ जैसा मंच ऐसे लोगों के लिए बहुत मददगार साबित होगा जिनकी रचनाओं का प्रकाशन नहीं हो पा रहा है। उनको प्रचार – प्रसार में मदद मिलेगी। रचनाकार को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है।
ऋषि कुमार शर्मा ने कहा कि जो बात महत्व की होती है वह महत्वपूर्ण होती है। वह साहित्य, संगीत व कला है। हम अकादमी सिर्फ पुस्तक प्रकाशित नहीं करती है बल्कि सेवा कर रही है। गैर सरकारी संस्थाएं भी बहुत काम कर रही हैं। हम पुरानी कथाओं को कॉमिक्स बनाकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। सुधाकर पाठक ने कहा कि सरकार के साथ जुड़ने पर कार्यक्रम सीमाओं में बंध जाते हैं लेकिन संस्थाओं के कार्यक्रम में ऐसा बंधन नहीं होता है। जमीन पर काम करने से भाषाएं ही नहीं साहित्य, संस्कृति, सभ्यता और संस्कार बचा पाएंगे। साहित्य की बात करने के लिए हमें संस्कार और पाठकों की बात करनी चाहिए।
*गालीगालौज के व्यंग्य के लेखन का कोई मतलब नहीं*
पांचवे सत्र में साहित्य व्यंग्य पर लेखक व सामाजिक चिंतक विश्वनाथ सिंह ‘राघव’ ने लेखक व व्यंग्यकार डॉ. अनूप शुक्ल, लेखक व व्यंग्यकार डॉ. आलोक पौराणिक से चर्चा की। आलोक पौराणिक ने कहा कि गालीगलौज के माध्यम से व्यंग्य नहीं कर सकते हैं। जिसे सबके सामने पढ़ नहीं सकते हैं उस लेखन का कोई मतलब नहीं है। स्टैंडअप कॉमेडी की गलीगलौज को साहित्य में शामिल नहीं कर पाएंगे। व्यंग्य विसंगतियों का रचनात्मक चित्रण है। हम हर चीज में व्यंग्य तलाश कर सकते हैं। आप आंख खोल लेंगे तो दिनभर व्यंग्य बरसता दिखाई देगा। व्यंग्य जिम्मेदारी वाला काम है और जब व्यंग्य पर पाबंदियां लगती हैं तो हास्य बन जाता है। व्यंग्य हास्य से बहुत अलग है। व्यंग्य उपन्यासकार सफेद शेर जैसे बहुत कम हैं।
अनूप शुक्ल ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल ने राग दरबारी बुन्देलखण्ड में पोस्टिंग के दौरान लिखा। हमें ये भी समझना होगा कि सिर्फ लेखन के माध्यम से जीवन बिताना संभव नहीं है। तकनीक ने लिखने के भी अवसर उपलब्ध कराए।
*अधिक इंटरनेट प्रयोग करने से भी ऊब पैदा होती*
छठवें सत्र लेखन की डिजिटल डायरी सत्र की कमान साहित्य अध्येता आयुष श्रीवास्तव ने संभाली। इसमें वक्ता वरिष्ठ पत्रकार मंजीत ठाकुर और लेखक बाबुषा कोहली मौजूद रहीं। बाबुषा ने कहा कि आज हम डिजिटल जीवन के अभ्यस्त हो चुके हैं, लेकिन हमें इसके मोहपाश में नहीं बंधना है। अधिक इंटरनेट प्रयोग करने से भी ऊब पैदा होती है। हमें आत्मानुशासन करना होगा। हम घर में नो मोबाइल जोन बनाकर, डिजिटल डेटॉक्स से इसकी शुरुआत कर सकते हैं। मंजीत ठाकुर ने कहा कि डिजिटल माध्यम का सही उपयोग ज़रूरी है। अगर 8-10 मिनट में उत्पादों की डिलीवरी हो रही है, तो क्या गलत है। अगर डिजिटली रामचरितमानस पढ़ी जा रही है, तो हमारे लिए तो अच्छा ही है। हम एआई को भी खारिज नहीं कर सकते, लेकिन उसका बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।
*पत्रकारिता अब 360 डिग्री बदल गयी*
सातवें सत्र में पत्रकारिता: जिम्मेदारियां बनाम चुनौतियां विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ऋतु भारद्वाज ने वरिष्ठ पत्रकार रीमा गौतम से बात की। रीमा ने कहा कि पत्रकारिता अब 360 डिग्री बदल गयी है। न्यू मीडिया में जानकारियों की बाढ़ है। ऐसे में क्या लेना, क्या छोड़ना, इसका विवेक छूट रहा है। आपसे दुनिया बदलने की अपेक्षा की जा रही है, जबकि आज पत्रकारिता मोड ऑफ सर्वाइवल है।
*बुक स्टॉल पर दिखा साहित्य का संगम*
परिसर में लगे बुक स्टॉल पर ढेरों किताबें हैं जिसमें धर्म, समाज, आध्यात्म, राजनीति, प्रथा से लेकर विभिन्न भाषाओं और वर्गों के लिए उपलब्ध हैं। प्रेमचन्द की संकलित कहानियों से लेकर हिमालय में विवेकानन्द, योगी कथामृत, गांधी से लेकर आंबेडकर, ए पी जे अब्दुल कलाम, बुन्देलखण्ड की लोक, संस्कृति और साहित्य, मोहब्बत, देशभक्ति, डरावनी कहानियां, बच्चों के लिए कॉमिक्स, जॉन एलिया आदि से संबंधित ढेरों किताबें हैं जहां खरीददारों की दिनभर लगी रहती है।
*प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मनमोह*
कार्यक्रम परिसर में अथाई मंच के युवाओं ने कविता, गायन और नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोह लिया। लोग प्रस्तुति को देखकर और गायन व कविताओं को सुनकर खुद को ताली बजाने से रोक नहीं पाए। मंच के सामने जगह – जगह सुंदर पेंटिंग लगी थी जो काफी आकर्षक लग रही थीं
*नदिया के पार अभिनेत्री गुंजा (साधना सिंह) करेंगी चर्चा आज*
पहले सत्र में बुंदेली की बुलंद आवाज विषय पर युवा लेखक अनमोल दुबे, बुंदेली गायिका कविता शर्मा और कवि पंकज पंडित से चर्चा करेंगे। दूसरे सत्र में धरोहर बुन्देलखण्ड विषय पर लेखक डॉ. अजय सिंह कुशवाहा, एडीएम सागर रूपेश उपाध्याय एवं एडीएम ललितपुर अंकुर श्रीवास्तव से चर्चा करेंगे। तीसरे सत्र में पारम्परिक साहित्य विषय पर कला, संस्कृति अध्येता विशाल पाण्डेय, लेखक डॉ. वेदवत्स, कथाकार तरुण भटनागर, लेखक वंदना यादव से चर्चा करेंगे। चौथे सत्र में भय मुक्त ‘डिजिटल इंडिया’ विषय पर पत्रकार ऋतु भारद्वाज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन और लेखक डॉ.ऋतु दुबे तिवारी से चर्चा करेंगे। पांचवें सत्र में मीडिया और विश्वसनीयता का समन्वय विषय पर आज तक के एडिटर धीरेंद्र राय, पत्रकार दिनेश गौतम से चर्चा करेंगे। 6वें सत्र में भारत और भारतीय ज्ञान परम्परा में शिक्षा विषय पर लेखक डॉ. अनिरुद्ध रावत, अधिष्ठाता छात्र कल्याण दिल्ली विश्वविद्यालय व लेखक प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी से चर्चा करेंगे। 7वें सत्र पर नदिया के पार (रीवाइव) विषय पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व कवि राजेश मिश्रा, अभिनेत्री साधना सिंह से चर्चा करेंगे। अनुष्का कौशिक: कैमरे के पीछे विषय पर बिग एफएम आरजे शाहनवाज, अभिनेत्री अनुष्का कौशिक से चर्चा करेंगे।
