बुंदेलखंड राज्य बने बिना शैक्षिक स्तर नहीं सुधरेगा
– कुंवर सत्येन्द्र पाल सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड क्रांति दल
बुंदेलखंड क्षेत्र सदियों से उपेक्षा और पिछड़ेपन का शिकार रहा है। यह क्षेत्र न केवल आर्थिक रूप से बल्कि शैक्षिक दृष्टि से भी पिछड़ा हुआ है। जब तक बुंदेलखंड एक स्वतंत्र राज्य नहीं बनेगा, तब तक यहाँ की शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाएगा।
बुंदेलखंड की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की औसत साक्षरता दर 74.04% थी, जबकि बुंदेलखंड का औसत साक्षरता प्रतिशत 65-70% के बीच था, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। यहाँ के कई जिले जैसे ललितपुर (52.92%), टीकमगढ़ (61.43%), पन्ना (64.79%) और छतरपुर (63.74%) अत्यंत निम्न साक्षरता दर वाले हैं। महिलाओं की स्थिति और भी दयनीय है, जहाँ उनकी साक्षरता दर कई जिलों में 50% से भी कम है।
इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. शिक्षा के लिए समुचित संसाधनों की कमी – सरकारी स्कूलों की स्थिति जर्जर है, पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, और उच्च शिक्षा संस्थानों की भारी कमी है।
2. सरकारी अनदेखी – उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारों की प्राथमिकता में बुंदेलखंड कभी नहीं रहा। बजट का बड़ा हिस्सा अन्य क्षेत्रों में जाता है, जिससे यहाँ के स्कूल और कॉलेज अव्यवस्थित रहते हैं।
3. आर्थिक बदहाली और पलायन – इस क्षेत्र में रोजगार की कमी के कारण युवा पढ़ाई बीच में छोड़कर रोज़गार की तलाश में पलायन कर जाते हैं।
4. लैंगिक असमानता – महिलाओं की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे महिला साक्षरता दर बेहद कम है।
बुंदेलखंड राज्य बनने की आवश्यकता
यदि बुंदेलखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिया जाए, तो इसका सीधा लाभ शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा। एक स्वतंत्र राज्य बनने से निम्नलिखित लाभ होंगे:
1. स्वतंत्र बजट और योजनाएँ – बुंदेलखंड का अपना शिक्षा बजट होगा, जिससे स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विकास में निवेश किया जा सकेगा।
2. स्थानीय नेतृत्व की प्राथमिकता – अलग राज्य बनने के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल बुंदेलखंड होगी, जिससे शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
3. उच्च शिक्षा के लिए नए संस्थान – मेडिकल, इंजीनियरिंग, कृषि और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की जाएगी, जिससे युवाओं को बाहर न जाना पड़े।
4. तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण – नए औद्योगिक और तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान खुलेंगे, जिससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
5. महिला शिक्षा को बढ़ावा – लड़कियों की शिक्षा के लिए विशेष योजनाएँ लागू की जाएंगी, जिससे लैंगिक असमानता को दूर किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
बुंदेलखंड की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का एकमात्र रास्ता इसे एक अलग राज्य बनाना है। जब तक यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अधीन रहेगा, तब तक इसे उचित शिक्षा सुविधाएँ नहीं मिल पाएंगी। हमें ‘बुंदेलखंड राज्य’ के लिए अपनी आवाज़ को और मज़बूती से उठाना होगा, ताकि इस क्षेत्र के युवा भी शिक्षित होकर अपने भविष्य को संवार सकें। बुंदेलखंड क्रांति दल इस संघर्ष को आगे भी जारी रखेगा और तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक हमें अपना हक नहीं मिल जाता।
जय बुंदेलखंड!
