कविता के सुरों से गूंजा भेल— युग साहित्य परिषद द्वारा भव्य काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह सम्पन्न
भेल- झांसी। रविवार को झांसी के भेल आरा मशीन क्षेत्र स्थित डॉ. वीरेंद्र कुमार जैन के निवास स्थान पर युग साहित्य परिषद के तत्वावधान में एक वृहद काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एन.डी. तिवारी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश कुमार गुप्ता ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार विजय प्रकाश सैनी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुई, जिसे श्रीमती ब्रज लता मिश्रा ने प्रस्तुत किया। इसके पश्चात सभा ने स्वर्गीय जितेंद्र कुमार जैन (पूर्व जॉइंट डायरेक्टर, सीबीएसई) और स्वर्गीय डॉ. वी.के.एल. के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
काव्य गोष्ठी में शामिल रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया।
नवोदित कवि हिमांशु चौधरी “हर्ष” ने वीर रस की कविता पढ़ी —
“अर्जुन पुत्र उत्तराधिपति था, नि:संदेह कौरवों के लिए क्षति था।”
डॉ. वीरेंद्र कुमार जैन, जो स्वयं प्राकृतिक चिकित्सक हैं, ने चिकित्सा जागरूकता की भावना से ओतप्रोत कविता सुनाई —
“आओ हम सब मिल अपने सरल सहज उपचार को।”
पंकज “अभिराज” की गजल ने खूब तालियां बटोरी —
“गजब खुशबू तेरी जुल्फों तेरे रुखसार से आए,
तू जिस जानिब भी जाए उस दरो दीवार से आए…”
आतिश “अनंत” ने जीवन दर्शन को छूती रचना सुनाई —
“हे ईश्वर तेरी माया, कहीं धूप कहीं छाया।”
श्रीमती गजरा जैन ने सुमधुर गीत में प्रेम की अभिव्यक्ति की —
“प्रेमी बनाकर प्रेम से जिनवर के गुन गया कर।”
मोहम्मद हनीफ “अंकुर” ने लोकतंत्र की पीड़ा को इन शब्दों में पिरोया —
“आओ मिलजुल कर कर लें बातें अब दो-चार जनाब,
देख दशा इस लोकतंत्र की आंख से बहती धार जनाब।”
आरिफ अली खेलारवी ने समाज की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा —
“कैसी यह दुनिया की हालत हो गई,
इश्क का मरकज अदालत हो गई।”
श्रीमती ब्रज लता मिश्रा की एक और प्रस्तुति रही —
“दूर हुई ग्रीष्म की तपन, आया मतवाला सावन।”
वैभव दुबे की शायरी रोमांटिक अंदाज़ में —
“टक टकी यूं लगाकर ना देखो मुझे,
मैं जो बरसा तो फिर प्यार हो जाएगा।”
श्रीमती रमा शुक्ला “सखी” ने जीवन के संघर्ष पर आधारित कविता सुनाई —
“मत रहो निराशा किसी विपदा से।”
श्रीमती प्रगति शंकर ने आत्मबल को इन शब्दों में प्रस्तुत किया —
“मुझको खुद से कम मत आंको, तुमसे थोड़ा ज्यादा हूं।”
सुशील जैन ने ऋतुओं और रिश्तों के भावों को जोड़ते हुए कहा —
“सावन भादो की देख मुलाकाते तुम,
कभी पतझड़ ना आए सोच रही हो।”
राम बहादुर ‘राधे-राधे’ ने गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित पंक्तियाँ सुनाईं —
“सबसे पहले शिष्य बनो, तुम सबसे पाई ज्ञान।”
मंच से जुड़े अतिथि भी बने कवि
मुख्य अतिथि विजय प्रकाश सैनी ने भी अपनी प्रभावशाली कविता के माध्यम से सामाजिक सरोकार को छुआ —
“संबंधों को जिलाए रखना,
दुआ-सलाम बनाए रखना,
सब लुट गया आज के दौर में,
जमीर किसी तरह बनाए रखना।”
कार्यक्रम का संचालन पन्नालाल “असर” ने बड़े ही प्रभावी और आकर्षक अंदाज़ में किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से भी श्रोताओं को बांधे रखा।
अंत में अध्यक्ष रमेश कुमार गुप्ता ने समस्त रचनाकारों की साहित्यिक प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए उन्हें साधुवाद दिया और काव्य मंचन को उत्कृष्ट बताया।
युग साहित्य परिषद द्वारा बाहर से आए सभी कवियों को साल, श्रीफल और माला पहनाकर सम्मानित किया गया। आयोजन ने झांसी की साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा दी और उपस्थित श्रोताओं में उत्साह भर दिया।
