बलरामपुर धर्मांतरण कांड पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, शालिनी सिंह पटेल ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र
बांदा। बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) में सामने आए सुनियोजित धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी नेटवर्क को लेकर जनता दल यूनाइटेड की उत्तर प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराने और दोषियों पर कठोर धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन द्वारा संचालित यह नेटवर्क न केवल भोले-भाले नागरिकों को भय, लालच व मानसिक शोषण के ज़रिए धर्मांतरण के लिए मजबूर कर रहा था, बल्कि इसके पीछे ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसी घातक विचारधारा का प्रसार और देश की संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियाँ भी सक्रिय थीं।
मामले की जांच कर रही एटीएस, एसटीएफ और ईडी की रिपोर्ट में विदेशी फंडिंग, हवाला लेनदेन और प्रशासनिक संरक्षण जैसी परतें उजागर हुई हैं।
शालिनी पटेल के अनुसार इस नेटवर्क के शिकार बने लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं की है, जिन्हें डिजिटल उत्पीड़न और मानसिक हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि देश की एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें सामान्य FIR से आगे जाकर संवैधानिक संस्थाओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष न्यायिक आयोग गठित किया जाए, मुख्य आरोपी व सहयोगियों पर NSA, UAPA और PMLA जैसे कड़े कानूनों में अभियोजन हो, पीड़ितों को राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा, पुनर्वास और मानसिक परामर्श मिले तथा उन अधिकारियों की सेवा समाप्त की जाए जिन्होंने इस नेटवर्क को संरक्षण दिया।
यह पत्र शालिनी सिंह पटेल द्वारा बांदा से रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से राष्ट्रपति भवन को प्रेषित किया गया है।
