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भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का किया गया आवाहन

ByBKT News24

Aug 14, 2025


भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का किया गया आवाहन

दिबियापुर। भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का किया गया आवाहनः- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर इंटर कॉलेज दिबियापुर में भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संस्कृति बोध परियोजना के बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर संस्कृति बोध परियोजना के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रमुख श्री राजेंद्र देव जी एवं कानपुर प्रांत के सेवा प्रमुख श्री शिव सिंह जी, संभाग निरीक्षक श्री अजय द्विवेदी जी, जन शिक्षा कानपुर संभाग के संभाग निरीक्षक श्री विजय जी, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजेश कुमार गुप्ता जी एवं दिबियापुर संकुल के सभी विद्यालय के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती के चरणों में पुष्पार्चन एवं दीपप्रज्वलन किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश जी ने सभी आए हुए अतिथियों का परिचय एवं सम्मान किया। कार्यक्रम के दौरान श्री राजेंद्र देव जी ने छात्र-छात्राओं को इसके उद्देश्य के बारे में बोलते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज को भारतीय संस्कृति के बारे में जागरूक करना है साथ ही इसके द्वारा राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा एवं देश भक्ति की भावना को जागृत कराना है और इसके माध्यम से छात्रों और समाज को भारतीय संस्कृति, धर्म इतिहास, पर्वों, तीर्थ स्थलों, पवित्र नदियों- पर्वतों एवं राष्ट्रीय महापुरुषों की जानकारी अत्यंत रोचक एवं सहज रूप में प्राप्त होती है। आज के इस कार्यक्रम में मातृ भारती की बहने, पुरातन छात्रों और विद्वत परिषद के विद्वानों, अभिभावकों, आचार्यों के साथ संस्कृति बोध माला के महत्व और इसके क्रियान्वयन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।
संभाग निरीक्षक अजय जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए एक शिक्षक की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें यह सिखाती है कि प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार में मानवता दिखनी चाहिए, इसी संस्कृति के कारण ही आज हमारे देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख और इसाई सभी धर्म के लोग एक साथ रहते हैं भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक है हमारी संस्कृति में विनम्रता और सम्मान का बहुत महत्व है। सभी आए हुए अतिथियों का आभार आचार्य श्री श्याम गुप्ता जी ने किया।


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