पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा अयोध्या धाम में होगा राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन
प्रा. अजय दासरी सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों को किया जाएगा सम्मानित
पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा अयोध्या धाम में 27 अप्रैल, 2025 को राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन रानीलक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ अरविन्द कुमार के मुख्य आतिथ्य एवं विद्यापीठ के कुलपति डॉ इंदुभूषण मिश्रा “देवेंदु” की अध्यक्षता में किया जाएगा ।
सम्मान समारोह में देश के विद्वानों सहित प्रसिद्ध नाट्यकर्मी, निर्देशक और अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद के नियामक मंडल सदस्य प्रा. अजय दासरी को को विशेष सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
प्रा. अजय दासरी एक जाने-माने नाट्य कलाकार, निर्देशक और निर्माता हैं। वे सोलापुर जिले सहित पूरे महाराष्ट्र और भारत के विभिन्न राज्यों में अपने मराठी नाट्य सृजन के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने महाराष्ट्र राज्य की प्रतिष्ठित नाट्य स्पर्धाओं में कई विशेष सम्मान प्राप्त किए हैं। वे 20 वर्ष की आयु से अब तक लगभग 100 से अधिक नाटकों का मंचन कर चुके हैं और उनकी हर प्रस्तुति को न केवल दर्शकों का अपार प्रेम मिला, बल्कि नाट्य प्रेमियों और कलाकारों से भी सराहना प्राप्त हुई।
उन्होंने दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तेलुगू संत कवि योगी वेमना से प्रेरित होकर नाट्य यात्रा शुरू की और शिक्षा, इतिहास तथा धार्मिक विषयों पर आधारित नाटकों का मंचन किया। उनके द्वारा प्रस्तुत ‘थैंक यू मिस्टर ग्लैड’, ‘वासवदत्ता’, ‘पड़घम ’ आदि नाटक सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं।।1985 में ‘शेजाऱ्यावर प्रेम करा’ नाटक में प्रमुख भूमिका निभाने के साथ उन्होंने रंगमंच पर अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद ‘थैंक यू मिस्टर ग्लैड’ ने उन्हें नाट्य जगत में एक अलग पहचान दिलाई। इस नाटक में मराठी रंगमंच के बड़े कलाकारों ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं। नाट्य क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए रखते हुए वे एक सामाजिक कार्यकर्ता भी रहे और तरुण भारत दैनिक पत्रिका में भी कार्य किया।
उन्होंने ‘काले बेट लाल बत्ती’, ‘भूमिका’, ‘विश्वदाभिरामा..’, ‘सावित्री फसली रे फसली’, ‘पद्म पत्र: स्थितं तोयं’, ‘कालाय तस्मै नमः’, ‘हद्दपार’ और ‘एक फॅन्टसी सूडाची’ जैसे नाटकों में अभिनय और बॅक स्टेज पर काम कर अपनी अद्वितीय प्रतिभा का परिचय दिया।
उनके मुंबई से सोलापुर तक के सफर में प्रारंभिक दस वर्षों तक वे मुंबई में सक्रिय रहे वर्तमान में वे अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद मुंबई के नियामक मंडल के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा “विद्या वाचस्पती सारस्वत सम्मान “ से सम्मानित किया जाएगा।
