*सती अनुसूइया की भक्ति-योग कथा पतिव्रता धर्म, तपस्या और नारी शक्ति का अद्भुत संगम है – हरिओम थापक*
*श्रीमद भागवत कथा रस वर्षण के द्वितीय दिवस में भक्तों ने श्रवण की कपिल मुनि अवतार के साथ सती अनुसुइया के प्रसंगों की कथा*
झाँसी – बालाजी रोड स्थित आयोध्या पुरी कॉलोनी में चल रही सुंदरकांड महिला सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद भागवत कथा रस वर्षण में समस्त भक्तों ने कपिल मुनि अवतारों के साथ सती अनुसुइया के प्रसंगो की कथा श्रवण की। सर्वप्रथम वैदिक आचार्यो द्वारा कलश पूजन एवं भागवत पूजन मुख्य परीक्षित श्रीमती शशि सतीश कुमार गुप्ता ने किया व उसके पश्चात कथा श्रवण कराते हुए मुख्य कथा व्यास राष्ट्रीय कथावाचक पूज्य आचार्य पं.हरिओम थापक जी महाराज ने कपिल मुनि अवतार, सृष्टि की उत्पत्ति के प्रसंगो सहित सती अनुसुइया के प्रसंगों का मुख्य वर्णन किया और बताया कि सती अनुसूया की भक्ति-योग कथा पतिव्रता धर्म, तपस्या और नारी शक्ति का अद्भुत संगम है, जिसमें त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) ने उनकी परीक्षा ली, जिन्हें उन्होंने अपनी सतीत्व शक्ति से शिशु रूप में बदल दिया, जिससे प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया और उनके पुत्र के रूप में दत्तात्रेय, चंद्रमा और दुर्वासा का जन्म हुआ, जो भक्ति और योग के महान गुरु बने। यह कथा हिंदू धर्म में नारी-शक्ति और पतिव्रता धर्म की मिसाल है, जो भक्ति और योग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। मनुष्य को सांसारिक भोगों से ऊपर उठकर भक्ति करनी चाहिए, गलती का प्रायश्चित करना चाहिए, और भगवान की लीलाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल सके और जीवन में सुख-समृद्धि आए। उन्होंने ओर भी बताया हैं कि कथा सुनने से पुण्य मिलता है और यह जीवन के दुखों का अंत करती है, और भक्ति ही जीवन का सबसे अच्छा निवेश है। साथ मे श्रोताओं को सांसारिक मोह छोड़कर भक्ति मार्ग पर चलने और भगवान की महिमा को समझने की प्रेरणा दी , जिससे उन्हें आध्यात्मिक शांति और मोक्ष प्राप्त हो सके। मानव जीवन मे भागवत कथा का बड़ा ही महत्व है कथा सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है व मन का शुद्धिकरण होता है यह अठारहों पुराणों में सर्वश्रेष्ठ महापुराण है इसका मुख्य विषय भक्ति योग है व कार्यक्रम में धर्मगुरु के रूप में पूज्य आचार्य मनोज थापक जी महाराज ज्योतिषाचार्य एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ ने भी पूजन-अर्चन व आरती की तथा इस अवसर पर मुख्य रूप से पं.मैथली मुदगिल, आलोक चतुर्वेदी, डॉ.प्रदीप पांडे, गणेश खरे, सुरेंद्र शर्मा, नीरज श्रीवास्तव, सजल शर्मा, कैलाश नारायण शर्मा, हरिशंकर कुशवाहा, विकास गुप्ता, पुरुषोत्तम गुप्ता व शांति थापक, निशा चतुर्वेदी, सरोज पाठक, सुधा खरे सहित आदि माताएं-बहने भक्तगण उपस्थित रहे व कार्यक्रम का संचालन पं.सियारामशरण चतुर्वेदी ने किया व अंत मे आभार ज्ञापन आलोक चतुर्वेदी ने किया।
